वतन के रखवाले
वतन के रखवाले
डगमगाए नहीं कदम कभी,
वतन पर जां दे देंगे सभी।
जोश तन मन में भरा है,
वतन के लिए जीते हम भी।
हम वतन के रखवाले हैं ,
दूसरे घर ना झांका करते हैं।
हम जुबान के पक्के हैं ,
किसी ले नहीं धोखा करते।
चांद ट रे ना सूरज ट रे ,
वादे नहीं ट रते कभी।
हम वतन के रखवाले हैं ,
डगमगाए नहीं कदम कभी।
टांग अड़ाने वाले बहुत हैं ,
जो मंजिल की ओर चले।
हम जिद पर आने वाले हैं,
चाहो जितना आजमा ले ।
राहों में आने वालों को ,
दिन के तारे दिखा देंगे वही।
हम वतन के रखवाले हैं ,
डगमगाए नहीं कदम कभी।
संस्कारी पेड़ के डाली में,
भारतीय संस्कार पलते हैं।
हम ऐसे देश के वासी हैं ,
जिंदगी खुशियों में ढलते हैं।
सरल सादगी देखकर हमें तू
प्रलोभन नहीं देना यों कभी ।
हम शेरों के संतान हैं जिसके,
डगमगाए नहीं कदम कभी।
डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार
Varsha_Upadhyay
02-Mar-2023 06:36 PM
बेहतरीन
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Gunjan Kamal
01-Mar-2023 08:42 AM
बहुत सुंदर
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Sushi saxena
26-Feb-2023 10:33 PM
Nice
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